यूपी के सरकारी जूनियर स्कूलों में कार्यरत अनुदेशक शिक्षकों की नौकरी समाप्त नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुदेशकों के पद स्वतः सृजित हो चुके हैं, इसलिए उनकी सेवाएं खत्म नहीं की जा सकतीं। अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का विरोध किया गया था। अब अनुदेशक शिक्षकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि अनुदेशकों की नियुक्ति भले ही संविदा के आधार पर हुई हो, लेकिन वे वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में उन्हें हटाना न केवल अनुचित होगा, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी। कोर्ट ने यह भी माना कि अनुदेशकों से नियमित शिक्षकों की तरह काम लिया जा रहा है, इसलिए उन्हें उचित मानदेय मिलना चाहिए। इस फैसले से प्रदेश के हजारों अनुदेशक शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है और उनकी नौकरी को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है।